Limitations of accounting in hindi

लेखांकन के माध्यम से हम व्यवसाय के स्वामी और व्यवसाय से सबंधित पक्षकारो को business से सम्बंधित लाभ और वित्तीय स्थिति के विषय में जानकारी सूचनाएं प्रदान करते है , इसके अतिरिक्त इसमें हम कई तरह के सूचनाएं प्रदान करते है , जिनके कुछ सीमाएं होती है Limitations of accounting in hindi में हम इन्ही सीमाएं का बारे में जानेंगे जो की निम्नलिखित है :-

  1. व्यक्तिगत निर्णयों से प्रभावित 
  2. अपूर्ण सूचना 
  3. लेखांकन की अवधारणाओं तथा परम्पराओ पर आधारित 
  4. गुणात्मक सूचनाओं का अभाव
  5. झूठे दिखावो से प्रभावित 
  6. भावी अनुमानों के लिए सही न होना 
  7. historical लागतों पर आधारित  

व्यक्तिगत निर्णयों से प्रभावित ( limitations of accounting in hindi )

हम जानते है की लेखांकन विज्ञान और कला दोनों है , और अभी तक लेखांकन पूर्ण रूप से विज्ञान नहीं बन पाया है , इस कारण  लेखाकार को विभिन तरह के विषय से खुद के विचारो से निर्णय लेना पड़ता है , उदहारण के लिए किसी तरह के सम्पत्ति पर interest लगाने के लिए सबसे पहले उसके उस सम्पति का वास्तविक मूल्य का अनुमान लगाना पड़ता  है , और मूल्य शुद्ध लगा पाना बहुत ही कठिन होता है , इन सभी का अनुमान विभिन लेखकरो द्वारा में विभिनता होना स्वायभाविक है , जिसके कारण कई वयक्तियो द्वारा एक फार्म की लाभ – हानि अलग – अलग आएगी , इस वजह से  (limitations of accounting in hindi ) में लेखांकन  द्वारा प्राप्त लेखा को बिलकुल सही नहीं माना जा सकता। 

अपूर्ण सूचना 

लेखांकन में सभी जानकारी  जैसे लेखांकन विवरण एक अपूर्ण सूचनाएं प्रदान करती है , क्यूंकि व्यवसाय की सही लाभ -हानि तभी ज्ञात हो सकती है जब व्यवासय को बंद कर दिया जाये। 

लेखांकन की अवधारणाओं तथा परम्पराओ पर आधारित 

लेखांकन को  अवधारणाओं तथा परम्पराओ पर आधारित बनाया गया है , इस्सलिये ये संभव है की प्रदर्शित किया गया लाभ और वित्तीय स्थिति सही न हो , उदहारण  के लिए स्थायी सम्पतियो में स्थिति विवरण में चालू व्यवसाय अवधारणा के अनुसार दिखाया जाता है , इससे ये पता चलता है की स्थायी सम्पतियो को लागत मूल्य पर दिखाया  जाता है न की बाजार मुलय पर , और इनके विक्रय से प्राप्त मूल्य इनके स्थिति विवरण पर दिखाए गए मूल्य से अधिक या फिर कम हो सकता है। limitations of accounting in hindi

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गुणात्मक सूचनाओं का अभाव

  लेखांकन में  लेखा करते समय केवल उन्ही सूचनाओं का लेखा किया जाता है जो की मुद्रा के रूप में हो , और व्यवासय के गुणात्मक तत्वों का लेखा नहीं किया जाता है क्यंकि इसको मुद्रा के रूप में व्यक्त नहीं  किया जा  सकता और व्यवासय में अनेक कारक जैसे  व्यवासय की प्रशिधि , प्रबंध में परिवर्तन , प्रबंध और श्रमिक में समबन्ध , फार्म की उत्पादकता में वृद्धि , प्रबंध की कुशलता  आदि को की फार्म की लाभप्रदर्ता में कई तरह के प्रभाव  डालते है , लेकिन इन सभी को छोड़ दिया जाता है , क्यूंकि ये सभी गुणात्मक प्रकृति के है। 

झूठे दिखावो से प्रभावित 

झूठे दिखावे मतलब लेखा करने में हेराफेरी करना है , जिसके  वजह से वित्तीय विवरण की स्थिति वास्तविक स्थिति से अधिक अनुकूल स्थिति प्रदर्शित करे , उदहारण के लिए यदि वर्ष के अंत में किये गए क्रय का लेखा न किया जाए और अंतिम stock का अधिक मूल्यांकन कर लिया जाये।  इस प्रकार के निर्णय से सही सूचनाएं प्राप्त नहीं होती। limitations of accounting in hindi

भावी अनुमानों के लिए सही न होना

लेखांकन में हम जो भी वित्तीय लेखा करते है वो सभी भूतकाल की घटनाओ से सम्बंधित होते है , और व्यवसाय में जैसे फर्म द्वारा बनाई गयी निति , वस्तु की मांग , प्रतिस्पर्धा की स्थिति समय के अनुसार बदलती रहती है , इस कारण ये संभव नहीं भूतकाल घटनाओ के आधार पर किया गया वित्तीय विश्लेषण भविष्य में अनुमान लगाने के लिए सही होगा। limitations of accounting in hindi

Historical लागतों पर आधारित  

लेखांकन द्वारा लेखो को Historical यानि प्रारम्भिक लागतो के आधार पर तैयार किया  जाता है इस कारण वित्तीय विवरणों में दिए गए आंकड़े मूल्य स्तर में परिवर्तनों के प्रभाव को प्रदर्शित नहीं करते है अधिक दशाओ में भूमि और भवन की दशा में सम्पतियो का अलप – मूल्यांकित  होता है इस कारण इस तरह के historical लागतो से यह प्रभाव पड़ता है की स्थिति विवरण में दिखाए गए सम्पतियो में मूल्य व्यवसाय की सही स्थिति विवरण का अनुमान लगाने में सहायक नहीं होते। limitations of accounting in hindi

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