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revaluation of assets and liabilities in hindi

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Revaluation of assets and liabilities in hindi :- नया साझेदार फर्म से प्रवेश करने से पहले इस बात से संतुष्ट होना चाहता है की पुस्तक में दिखाई गयी सम्पतियो और दायित्वों का मूल्य सही है या नहीं इस कारण assets और liabilities का फिर से valuation किया जाता है।

सम्पतियो और दायित्वों का पुनर्मुल्यांकन क्या है ? revaluation of assets and liabilities in hindi

नए और पुराने साझेदार दोने चाहते है की फर्म के ज़्यादा समय होने के बाद फर्म का पुनर्मुल्यांकन किया जाए क्यूंकि समय ज्यादा  होने पर फर्म के सम्पत्ति और दायित्वों में परिवर्तन हो जाता है और इसका उचित लेखा करना भी आवश्यक होता है। इसको revaluation of assets and liabilities कहते है।

सम्पतियो और दायित्वों का पुनर्मुल्यांकन कैसे करते है ? revaluation of assets and liabilities

सम्पत्तियो और दायित्वों का पुनर्मुल्यांकन के लिए एक पुनर्मुल्यांकन खाता बनाया जाता है जो की लाभ -हानि समायोजन खाते के समान होता है। इस कारण हम इसमें हानियों की राशि से इस खाते को debit करते है और लाभ की राशि से इस खाते को credit करते है।

revaluation of assets and liabilities in hindi

इसके लिए निम्न Journal entry करते है :-

(1) सम्पतियो का मूल्य कम होने पर 

Revaluation A/c or Profit & Loss adjustment A/c                            Dr.

         To Assets A/c

(Decrease in the value of assets)

(2) सम्पतियो का मूल्य बढ़ने पर 

Assets A/c                                                                                        Dr.

          To Revaluation A/c or Profit & Loss Adjustment A/c

(Increase in the value of assets)

(3) दायित्वों का मूल्य बढ़ने पर 

Revaluation A/c or Profit & Loss Adjustment A/c                             Dr.

     To Liabilities A/c

(Increase in the value of liabilities)

(4) दायित्वों का मूल्य घटने पर 

Liabilties A/c                                                                                    Dr.

To Revaluation A/c or profit & loss adjustment A/c

(Decrease in the value of liabilities)

उपरोक्त entry के आधार पर पुनर्मुल्यांकन खाता और लाभ -हानि समायोजन खाता तैयार किया जाता है। यदि इस खाते की credit side अधिक है तो लाभ होगा तथा debit side अधिक है तो हानि होती है।

और इस लाभ या हानि को पुराने साझेदारों में उनके पुराने लाभ -हानि विभाजन अनुपात में बाँट दिया  जाता है।

इसके लिए निम्नलिखित journal entry की जाती है :-

(5) (a) लाभ होने पर लेखा 

Revaluation A/c                                                      Dr.

      To old Partner’s Capital A/cs

(Profit on revaluation credited to old partner’s capital A/cs)

(5) (b) लाभ होने पर लेखा

Old partner’s Capital A/cs                                       Dr.

         To Revaluation A/c

(Loss on revaluation debited to old partner’s capital A/cs)

इस तरह से revaluation of assets and liabilities in hindi के अंदर entries को किया जाता है।

ये भी पढ़े :- 

  1. admision of a partner class 12 in hindi
  2. Goodwill kya hai in hindi
  3. Journal entry rules in hindi

Conclusion 

इस पोस्ट (revaluation of assets and liabilities in hindi) में हमने जाना की सम्पतियो और दायित्वों का पुनर्मुल्यांकन क्या है ? सम्पतियो और दायित्वों का पुनर्मुल्यांकन कैसे करते है ? निम्न revaluation of assets and liabilities Journal entry के बारे में जाना।  आप हमको comment के माध्यम से भी अपने सवाल doubt को पूछ सकते है।

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